सोनाली ने पुलिस की गाड़ी का 10 साल इस्तेमाल किया, जांच शुरू हुई तो 9 साल का रिकॉर्ड गायब
पुलिस अधिकारियों की बहन बनकर रौब जमाने वाली सोनाली शर्मा के गिरफ्त में आने के सात दिन बाद भी जांच अधिकारी यह पता नहीं लगा सके हैं कि सोनाली को डीआरपी लाइन से एसपी की गाड़ी व गनमैन किसके आदेश पर मिला था। मामले में डीआरपी लाइन के अधिकारी व पुलिस की मोटर व्हीकल शाखा के अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। उधर, भोपाल से आई विशेष टीम भी इस मामले में गुपचुप तौर पर जांच करके चली गई है।
एडीजी रैंक के ही अफसरों ने आदेश देकर गाड़ी की सुविधाएं दिलवाई थीसूत्र बताते हैं 2008 से सोनाली डीआरपी लाइन से वाहन की सुविधा एडीजी स्तर के अधिकारी की रिश्तेदार बताकर ही ले रही थी, लेकिन जांच कर रही टीम को डीआरपी लाइन से 2017 से अब तक का रजिस्टर का रिकॉर्ड ही मिला है। बाकी पुराने सभी रजिस्टर गायब हो गए हैं। मामले में सस्पेंड किए गए आरआई अनिल राय ने भास्कर को बताया उनकी कोई लापरवाही नहीं है। उनसे पहले जो भी आरआई थे, वे सोनाली को एडीजी की बहन बताकर ही गाड़ी की सुविधाएं देते आ रहे थे। उनके (राय) कार्यकाल में भी एडीजी रैंक के ही अफसरों ने उन्हें आदेश देकर गाड़ी की सुविधाएं दिलवाई थी।
सोनाली के 13 बार अधिकृत तौर पर रुकने का रिकॉर्ड जब्त
पश्चिम एसपी विवेक सिंह के मुताबिक सोनाली उर्फ सोनिया उर्फ माया शर्मा को डीआरपी लाइन से जो कार (एंबेसेडर) मिली थी, वह किसके आदेश पर दी गई थी, इसका अब तक कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। पुलिस ने मैस में उसके 13 बार ऑफिशियल तौर पर रुकने का रिकॉर्ड जब्त कर लिया है। सोनाली 13 बार पूर्व लोकायुक्त डीजी दिलीप कापदेव के रेफरेंस पर ठहरी थी।
गोपनीय तौर पर गायब करवा दिए दस्तावेज
सूत्रों की मानें तो मैस में सोनाली के ठहरने से जुड़े और भी रिकॉर्ड थे लेकिन ये रिकॉर्ड किसी बड़े अधिकारी के निर्देश पर गुपचुप ढंग से गायब करवा दिए गए हैं। इधर डीआरपी लाइन में भी पुलिस के ऑफिसर मैस जैसी ही अव्यवस्था पता चली है। यहां विभाग के अफसरों, उनके घर के सदस्यों और रिश्तेदारों को सुविधाएं देने के लिए डीआरपी लाइन से ही वाहन भेजे जाते थे। लेकिन इन वाहनों को भेजने का रिकॉर्ड सिर्फ रजिस्टर में ही एंट्री के तौर पर रखा जाता था। ऑनलाइन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रहता था।
कम्प्यूटराइज्ड रिकॉर्ड के अभाव में नहीं मिल रही जांच अफसरों को कोई भी जानकारी
मामले में जांच अफसरों को अब तक किसी तरह का कम्प्यूटराइज्ड रिकॉर्ड नहीं मिला है, जिससे पता चल सके कि सोनाली को कब-कब और किसके आदेश पर गाड़ी का अलॉटमेंट हुआ है।
एडीजी, एसपी, एएसपी, सीएसपी से संपर्क का खुलासा, फिर भी नहीं लिए बयान
सोनाली से संपर्क में रहे एक भी बड़े अधिकारी के अब तक न तो बयान हुए हैं न उनसे विस्तृत पूछताछ की गई। अब तक की जांच में सोनाली के एडीजी पवन श्रीवास्तव, भोपाल एसपी नॉर्थ हेमंत चौहान, एएसपी घनश्याम मालवीय, सीएसपी ज्योति उमठ से संपर्क की बात का खुलासा हो चुका है। यह भी पता चला है कि सोनाली के पुलिस मुख्यालय में शिकायत शाखा के एक एएसपी रैंक के अफसर से भी अच्छे संबंध थे। उक्त अफसर का रौब दिखाकर भी सोनाली ने कई लोगों को धमकाया है।

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