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बदतर थीं स्कूल बसें, फर्स्ट एड बाॅक्स और अग्निशमन यंत्र तक नहीं, टीम को देखते ही भाग निकले ड्राइवर


प्रीम कोर्ट की गाइडलाइन से चलती नहीं मिलीं 30 बसें इन पर नजर नहीं प्रशासन की सख्ती के बाद भी ऑटो में ठूंसे...
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन से चलती नहीं मिलीं 30 बसें

इन पर नजर नहींप्रशासन की सख्ती के बाद भी ऑटो में ठूंसे बच्चे

एसडीएम की जांच

डीपीएस इंदौर बस हादसे के पांच दिन बाद मप्र बाल अधिकार सरंक्षण आयोग ने बसों में सफर करने वाले स्कूली बच्चों की सुध ली। आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा और सदस्य ब्रजेश चौहान ने बुधवार को दो घंटे सेंट मेरी स्कूल और सागर पब्लिक स्कूल का निरीक्षण किया। सेंट मेरी स्कूल में बसों की स्थिति बद से बदतर मिली। बसों में न तो फर्स्ट एड बाॅक्स था ओर अग्निशमन यंत्र। स्कूल की खड़ी चार बसों के ड्राइवर टीम को देखते ही भाग गए। आयोग ने पाया कि बसों के अंदर बच्चों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। एक बस 20 साल से पुरानी थी। स्कूल प्रबंधन के पास बसों का व्यवस्थित रिकाॅर्ड नहीं था। आयोग ने स्कूल प्रबंधन को सात दिन के अंदर व्यवस्थाएं सुधारने का समय दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जाएगी। वहीं सागर पब्लिक हायर सेकंडरी स्कूल में ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं मिला, ड्राइवर-कंडक्टर बिना वर्दी के थे।

बिना वर्दी के घूम रहे ड्राइवरों का नहीं था पुलिस वेरिफिकेशन

आयोग की टीम ने सागर पब्लिक स्कूल की बसों के जीपीएस सिस्टम को चेक किया। बसों के स्पीड गर्वनर भी चेक किए। आयोग ने पाया कि यहां पर ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं था। कुछ बसें पुरानी थीं। बसों में बिना वर्दी वाले ड्राइवर-कंडक्टर मिले। आयोग ने पाया कि स्कूल परिसर के कुछ कैमरे खराब थे। आयोग ने प्रबंधन को सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

मानवाधिकार आयोग ने पूछा

प्रदेश में क्यों चल रहीं दूसरे राज्यों की अनफिट बसें

इंदौर हादसे के बाद मानवाधिकार आयोग ने भोपाल सहित प्रदेश में चल रही कंडम स्कूल बसों के मामले में संज्ञान लिया है। आयोग ने परिवहन आयुक्त से पूछा है कि प्रदेश में कितनी बसें दूसरे राज्यों की चल रही है। जो यात्री बसें दूसरे राज्यों में अनफिट घोषित कर दी गई है, उन्हें प्रदेश में फिटनेस का सर्टिफिकेट क्यों जारी किया जा रहा है। दस साल से अधिक वाली कितनी बसें चल रही हैं।









कंडम बसों को लेकर अब तक परिवहन विभाग ने क्या कार्रवाई की है। कितनों के परमिट निरस्त किए है। आयोग यह भी पूछा है कि विभाग ने कंडम स्कूली वेन और ओवर लोडेड ऑटो रिक्शों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। आयोग ने मामले में 15 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है।

इंदौर में हुए हादसे के बाद भी कुछ स्कूल संचालक और वाहन चालकों ने इससे सबक नहीं लिया है। इमामीगेट से गुजर रहे एक ऑटो में बच्चों को ठूंसकर भरा गया है। सख्त चैकिंग का दावा करने वाले प्रशासन की शायद इस पर नजर नहीं गई है।

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