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भारत-पाकिस्तान : ऐसे हुए थे एक दिल के दो दुकड़े

mahatma gandhi and Muhammad Ali Jinnah

दीपक राय, भोपाल...

''ये तो वही बात हुई आप एक दिल के दो टुकड़े कर देंगे और उम्मीद करेंगे कि वह धड़कता रहे।''
 - महात्मा गांधी (पाकिस्तान विभाजन के वक्त बयान)
70 साल पहले जब हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो एक दिल दो धड़कनें बन गईं। पाकिस्तान विभाजन के वक्त 'क्या' हुआ, उसे 'कौन' विभाजित कराया, 'कहां' से विभाजन हुआ, 'कब कैसे' हालात बने, ये हालात 'क्यों' बने, 'किस' तरह पाकिस्तान बना। पढि़ए संपूर्ण कहानी... दिसंबर 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की पहली बैठक मुंबई में हुई थी। पहले बीस वर्षों में, कांग्रेस का ज़ोर आज़ादी से ज्यादा ब्रिटिश राज में रह रहे भारतीय लोगों की दशा सुधारने पर था, लेकिन 1905 में बंगाल के विभाजन के बाद, कांग्रेस ने राजनीतिक सुधार की मांग तेज कर दी और आखिरकार पूर्ण स्वराज के लिए आवाज़ उठाई। 1906 में भारतीय मुसलमानों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए मुस्लिम लीग की स्थापना की गई।
1938-1942 : गांधी और जिन्ना वार्ता विफल
फरवरी 1938 में महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना ने देश में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जारी तनाव का हल निकालने के लिए बातचीत शुरू की, लेकिन  बातचीत जुलाई में नाकाम हो गई। दिसंबर में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के उत्पीडऩ की जांच के लिए एक समिति बनाई। 23 मार्च 1940 को आया। इस दिन मुस्लिम लीग ने लाहौर में एक प्रस्ताव रखा जिसे बाद में 'पाकिस्तान प्रस्ताव' के नाम से भी जाना गया। यहां पूरी तरह आज़ाद मुस्लिम देश बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया। वायसराय लिनलिथगो ने अगस्त प्रस्ताव की घोषणा की, जिसमें कार्यकारी परिषद और एक नई युद्ध सलाहकार परिषद में भारतीय प्रतिनिधियों की नियुक्ति किए जाने का ऐलान हुआ। कांग्रेस और लीग ने अगस्त प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया और 17 अक्टूबर को कांग्रेस ने अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ दिया। ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने राजनीतिक और कानूनी गतिरोध दूर करने की कोशिश की। इसके लिए 11 मार्च 1942 को ब्रिटिश संसद में घोषणा की गई कि इंग्लैंड के प्रसिद्ध समाजवादी नेता सर स्टिफडऱ् क्रिप्स को जल्द ही नए सुझावों के साथ भारत भेजा जाएगा जो राजनीतिक सुधारों के लिए भारतीय नेताओं से बातचीत करेंगे। 22-23 मार्च 1942 को सर स्टिफर्ड क्रिप्स दिल्ली आए। उन्होंने भारतीय नेताओं से लंबी बातचीत की और 30 मार्च को क्रिप्स प्रस्ताव प्रकाशित हुआ। क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों को भारतीय राष्ट्रवादियों ने नामंज़ूर कर दिया। 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ। गांधी और जिन्ना ने सितंबर 1944 में पाकिस्तान की मांग पर बातचीत की, पर ये वार्ता नाकाम रही। इस मुद्दे पर दोनों में गहरे मतभेद थे।

पाकिस्तान पहले, आजादी बाद में : जिन्ना
जिन्ना को पाकिस्तान पहले चाहिए था और आज़ादी बाद में, जबकि गांधी का कहना था कि आज़ादी पहले मिलनी चाहिए। ऐसी आज़ादी जिसमें प्रमुख रूप से हिंदू बहुमत वाली अस्थायी सरकार, मुसलमानों की पहचान सुरक्षित रखने का आश्वासन दे। 1946 में मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन की योजना से खुद को अलग कर लिया और आंदोलन छेड़ दिया जिसके बाद देश भर में मारकाट शुरू हो गई। हिंसा की पहली लहर कलकत्ता में 16 से 18 अगस्त के बीच शुरू हुई। 'ग्रेट कैलकटा किलिंग्सÓ के नाम से याद की जाने वाली इस घटना में करीब 4000 लोग मारे गए, हजारों घायल हुए और लगभग एक लाख लोग बेघर हुए। इस हिंसा की आग पूर्वी बंगाल के नोआखाली जि़ले और बिहार तक फैल गई।

1947: विभाजन का साल
29 जनवरी को मुस्लिम लीग ने संविधान सभा को भंग करने की मांग की, फऱवरी में पंजाब में भी सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 तक भारत छोड़ देगा और लॉर्ड माउंटबेटन वायसरॉय का पद संभालेंगे। 24 मार्च को लॉर्ड माउंटबेटन ने वायसरॉय और गवर्नर जनरल के पद की शपथ ली। 15 अप्रैल को गांधी और जिन्ना ने मिलकर आम लोगों से हिंसा और अव्यवस्था से दूर रहने की अपील की। 2 जून को माउंटबेटन ने भारतीय नेताओं से विभाजन की योजना पर बात की और 3 जून को नेहरू, जिन्ना और सिख समुदाय के प्रतिनिधि बलदेव सिंह ने ऑल इंडिया रेडियो के प्रसारण में इस योजना के बारे में जानकारी दी।
...और बन गया पाकिस्तान
आखरि़कार 14 अगस्त को एक नया मुल्क पाकिस्तान बना और पाकिस्तान ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया। 14 अगस्त की रात बारह बजे ब्रिटेन और भारत के बीच सत्ता का स्थांनातरण हुआ और 15 अगस्त को भारत ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया। लगभग सवा करोड़ लोग अपना घर-बार छोड़ देश बदलने को मजबूर हो गए। अंदाज 5 से 10 लाख लोग हिंसा में मारे गए। हजारों महिलाओं को अगवा कर लिया गया। इतिहास के पन्नों में ऐसी त्रासदी की मिसाल बहुत कम मिलती है। ऐसा कत्लेआम जिसमें बंटवारे की रेखा अपने साथ गुस्सा, बेबसी और क्रूरता का सैलाब लेकर आई। यह रेखा अपने पीछे ऐसे ज़ख्म छोड़ गई जिन्हें आज भी दोनों देश पूरी तरह भर नहीं पाए हैं।
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70 साल की 70 उपलब्धियां
-1948 लंदन ओलिंपिक्स में भारतीय हॉकी टीम ने पहला गोल्ड मेडल जीता
-1949 में मुथम्मा बेलीअप्पा आईएएस परीक्षा पास करने वाली पहली महिला बनीं
-26 नवंबर 1949 को हमारा संविधान, संविधान सभा द्वारा पारित, 26 जनवरी 1950 से प्रभावी
-1951 में एशियन गेम्स के पहले संस्करण की मेजबानी की, आईआईटी खडग़पुर की स्थापना
-1952 में भारत में पहली बार चुनाव हुए, जिसमें करीब 17 करोड़ लोगों ने वोट दिए
-1953 में फ्लैग कैरियर इंडियन एयरलाइंस की स्थापना
- 1954 में ट्रॉमबे में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम लॉन्च करने वाला भारत पहला देश बना
-1955 में भारत का पहला कंप्यूटर एचईसी2एम कोलकाता में लगाया गया
-1956 में भारतीय हॉकी टीम ने मेलबर्न ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता
-1957 में आरती साहा इंग्लिश चैनल पार करने वाली एशिया की पहली महिला बनीं
-1958 में आईआईटी बांम्बे की स्थापना
-1959 में सत्यजीत रे की 'आपुर संसारÓ ने भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दी
-1960 के रोम ओलंपिक में मिल्खा सिंह विश्व रिकॉर्ड तोडऩे वाले पहले भारतीय बने
-1961 में गुट निरपेक्ष देशों की पहली बैठक का नेतृत्व किया
-1962 में फुटबॉल टीम ने सबसे ऊंची रैंकिंग हासिल कर एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता
-1963 में देश को मिला भाखरा नांगल बांध
-1964 में पहले भारतीय जेट ट्रेनर एचजेटी-16 ने उड़ान भरी
- 1965 में हरित क्रांति की प्रारंभ
-1966 में रीता फारिया मिस वल्र्ड चुनी गईं
-1967 में पंडित रवि शंकर ने पहला ग्रैमी अवार्ड जीता
-1968 में डॉ पफुल्ल सेन हार्ट ट्रांस्प्लांट सर्जरी करने वाले दुनिया के तीसरे और एशिया के पहले डॉक्टर बने
-1969 में हुई अंतरिक्ष में बड़ा कदम, इसरो की स्थापना
-1971 में भारत ने बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाने सैन्य हस्तक्षेप कर मदद पहुंचाई
-1973 में प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया गया
-1974 में भारत ने परमाणु परीक्षण कर लिया
-1975 में भारत को पहला उपग्रह आर्यभट्ट मिला
-1976 में बंधुआ मजदूर की प्रथा को समाप्त
-1977 में माइकल फरेरा ने मेलबर्न में वलर्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीता
-1978 में भारत के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी, दुर्गा का जन्म हुआ
-1979 में सुप्रीम कोर्ट ने दी जनहित याचिका वैध मान लिया
-1980 में स्मॉल पॉक्स (छोटी माता) बीमारी से निपटने सबसे लंबे टीकाकरण कार्यक्रम प्रारंभ किया
-1981 में भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी पहली दवा ट्रोमैरिल तैयार की
-1982 में एशियन गेम्स की मेजबानी की
-1983 में भारतीय क्रिकेट टीम ने लंदन में जीता वल्र्ड कप
-1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने
-1985 में भारत फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने वाला छठा देश बना
-1986 में 10वें एशियाई खेलों में भारतीय एथलीट पीटी उषा ने 4 स्वर्ण पदक जीते
-1987 में सुनील गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने
-1988 में इसरो ने एशिया की पहली रिमोट सेंसिंग सेटलाइट आईआरएस-1 ए
- 1989 में केरल का कोट्टायम भारत का पहला पूर्ण साक्षर जिला घोषित किया
दुनिया का सबसे बड़ा एयरलिफ्ट
-1990 में कुवैत और ईरान से 1,10,000 भारतीयों को भारत सरकार ने सुरक्षित निकाला, जोकि दुनिया का अबतक का सबसे बड़ा एयरलिफ्ट माना जाता है
-1991 में भारत ने कई सुधार कार्यक्रमों की घोषणा की, जिससे बड़े आर्थिक संकट से निपटा गया
-1993 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा फंड ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत को छठा स्थान दिया
-1993 में फिल्मकार सत्यजीत रे ने ऑस्कर जीता
-1994 में सुष्मिता सेना ने मिस यूनिवर्स और एश्वर्या राय ने मिस वल्र्ड काा खिताब जीता
-1995 में भारतीयों ने इंटरनेट पर पहली बार लॉग इन किया
-1996 में लिएंडर पेस ने ओलिंपिक में कांस्य पदक जीता, उनका ये पदक 44 साल में भारत का पहला एकल पदक था
-1997 में अरुंधती राय ने अपना पहला उपन्यास 'गॉड ऑफ स्माल थिंग्सÓ के लिए बुकर प्राइज जीता
-1998 में अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन ने नोबल पुरस्कार जीता
-1999 में इंफोसिस  अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज के नास्डैक में लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी
-2000 में विश्वनाथन आनंद ने वल्र्ड शतरंज (चेस) चैंपियनशिप जीता
-2001 में भारतीय लड़ाकू विमान तेजस ने पहली उड़ान भरी
-2002 में भारतीय क्रिकेट टीम ने लंदन में नेटवेस्ट सीरीज जीती
-2003 में सानिया मिर्जा विम्बलडन डबल्स ट्रॉफी जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी
- 2004 ओलिंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौर ने रजत पदक जीता
-2005 में भारत की जनता को सूचना का अधिकार मिला
-2006 में परिमर्जन नेगी इंटरनेशनल चेस ग्रांडमास्टर बनने वाले सबसे युवा एशियाई बने
-2007 में प्रतिभा पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं
-2008 में अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलिंपिक्स में शूटिंग में गोल्ड मेडल जीता
-2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया
-2010 में शिक्षा के अधिकार को संवैधानिक अधिकार घोषित किया गया
-2011 में 28 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एम एस धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया ने क्रिकेट वल्र्ड कप जीता
-2012 में भारत ने लंदन ओलिंपिक 6 मेडल जीते
-2013 में मंगलायन ने मंगल ग्रह पर चक्कर लगाया
-2014 में डब्लयूएचओ ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया
-2015 में सानिया मिजऱ्ा टेनिस और सायना नेहवाल बैडमिंटन में टॉप पर रहीं
-2016 में भारत ने महिला फाइटर पायलटों के पहले बैच को ट्रेनिंग दी
-3 अगस्त, 2016 को जीएसटी बिल पारित किया
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आजादी के 70 साल, सामने हैं अनसुलझे सवाल
आज भारत को आजाद हुए 70 साल बीत गए। इस समय में भारत ने तेजी से विकास का सफर तय किया है। जमीं से लेकर आसमां तक दुनिया में भारत की तूती बोल रही है। 1947 के बाद से आज हमारा भारत देखते ही देखते ही देखते बदल गया। लेकिन कुछ चुनौतियां हमारे देश को अब भी कमजोर बनाए हुए हैं। साल दर साल अच्छी फसल पैदा हो रही है। सरकार रिकॉर्ड टूटने की बात कहती है, लेकिन इस बीच किसानों के परिवार के हालात बदतर ही हुए हैं।

आतंकवाद : भारत, आतंकवाद से प्रभावित देशों की सूची में चौथे नंबर पर है। यह देश की सबसे बड़ी समस्या है।

बेरोजगार : 130 करोड़ आबादी के साथ भारत जनसंख्या के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर है। इतनी बड़ी आबादी के लिए रोजगार आज भी चुनौती बना हुआ है।

भ्रष्टाचार : एक सर्वे के मुताबिक 54 फीसदी लोगों ने किसी न किसी काम के लिए रिश्वत दी। देश का हर दूसरा शख्स रिश्वत देने में यकीन रखता है।


नक्सलवाद :  2015 में 791 आतंकी हमले हुए जिनमें से 43 प्रतिशत हमले नक्सलियों ने किए। छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, प. बंगाल सबसे अधिक नक्सल प्रभावित राज्य हैं

जनसंख्या  : 2020 तक देश में कामकाजी उम्र के लोगों की आबादी 90 करोड़ तथा नागरिकों की औसत आयु 29 वर्ष हो जायेगी जो चिंता का विषय है।

नकली नोट : देश भर में लगभग 400 करोड़ रुपये मालियती नकली मुद्रा का चलन है जो चिंतनीय है।

ड्रग्स : पूरे भारत की बात करें तो दक्षिण एशिया में भारत हेरोइन का सबसे बड़ा अड्डा है इसमें युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है।

शिक्षा : खराब शिक्षा व्यवस्था एक चिंता का कारण है स्कूलों में कक्षा पांच में पहुंचने वाले बच्चों में 50 प्रतिशत कक्षा दो की पुस्तकें भी नहीं पढ़ पाते।

स्वास्थ्य व्यवस्था : भारत में 1,050 मरीजों के लिए सिर्फ एक ही बिस्त उपलब्ध है। 1,000 मरीजों के लिए 0.7 डॉक्टर मौजूद हंै।

साइबर अपराध :  तेजी से डिजिटल होते भारत में जहां एक तरफ लोग आधुनिक हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ साइबर क्राइम भी बढऩे लगा है। ऑनलाइन अपराध बढ़े हैं।

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एक ऐसे प्रधानमंत्री जिन्हें भूखा रहना पसंद था
पर झूठ बोलना नहीं
1965 में एक अमरीकी अखबार को दिए गए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अमेरिका द्वारा वियतनाम में चलाए गए युद्ध को 'आक्रामकता का कार्यÓ बताया। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन गुस्सा गए। इस पर अमेरिका ने भारत को खाद्यान्न भेजने पर पाबन्दी लगा दी और भारत सरकार मुश्किल में पड़ गई। एक समय ऐसा आ गया था जब देश में मात्र सात दिनों का खाद्य भंडारण बाकी रह गया था। सब ओर हाय तौबा मच गई। तब प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देशवासियों से सोमवार को उपवास करने की अपील की थी। तभी तो देश में खाद्य आत्म-निर्भरता लाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को समझते हुए उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया था। शास्त्री जी के दुग्ध संघों के माध्यम से सफेद क्रांति के पश्चात प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने एक तरह से स्वयं ही हरित क्रांति के बीज बोये। एक ओर सरकार ने मेक्सिको से ड्वार्फव्हीट की उच्च उत्पादक प्रजाति आयात की तो दूसरी ओर सिंचाई एवं रासायनिक खाद और कीटनाशक जैसी बाह्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई। बाकी काम किसानों ने संभाल लिया। 1967 में हरित क्रांति के बाद की पहली फसल की पैदावार पिछली पैदावार से रिकॉर्ड पांच मिलियन टन अधिक थी। तब से देश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
1970 में जब सरकारी शिक्षक की तनख्वाह 90 रुपये प्रतिमाह थी तब गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 76 रुपये प्रति क्विंटल था। आज उन शिक्षकों की तनख्वाह 555 प्रतिशत बढ़ गई। अगर गेहूं के मामले में देखा जाये तो समर्थन मूल्य सिर्फ 21 प्रतिशत ही बढ़ा है।
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दुनियाभर में भारत का डंका
भारतीय कंपनियों ने विदेशी कंपनी अधिग्रहित की
आजादी के 70 साल के इतिहास में भारत में ऐसी कई कंपनियां रही हैं, जिन्होंने देश के साथ-साथ विदेश में भी अपना डंका बजाया है। इन कंपनियों ने ऐसी नामी विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण किया है, जिनके प्रॉडक्ट को इस्तेमाल करने पर एक जमाने में स्टेटस सिंबल माना जाता था। टाटा, ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल हैं।
टाटा : 2006 में कोरस का 12.7 अरब डॉलर में अधिग्रहण करके टाटा स्टील ने ब्रिटेन में कदम रखा था। यह उस वक्त किसी भी भारतीय कंपनी द्वारा किया गया यह सबसे बड़ा अधिग्रहण था। इसके बाद  टाटा मोटर्स ने मार्च 2006 में जैगुआर और लैंड रोवर का 2.3 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया था। 2012 में टाटा समूह की अन्य कंपनी इंडियन होटल कंपनी ने अक्टूबर 2012 में ओरिएंट होटल का 1.67 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज : मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज प्राइवेट सेक्टर में विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण करने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई थी। अप्रैल 2010 में इसने अमेरिका में एक कंपनी से तेल और गैस क्षेत्र में 1।7 बिलियन डॉलर की डील की थी। फिर उसी साल जून में 1.35 बिलियन डॉलर की ईगल फोर्ड गैस फील्ड का अधिग्रहण किया था।

ओएनजीसी : ऑयल एंड नैचुरल गैस कंपनी (ओएनजीसी) की सहायक कंपनी ओएनजीसी विदेश ने 16 देशों में अधिग्रहण किया है। ओएनजीसी विदेश ने, एक्सॉनमोबिल, ब्रिटिश पेट्रोलियम, शेल ईएनआई, टोटल, रेपसोल, स्टाटऑयल, शेवरॉन, पेट्रोब्रास, सोडेको, साकार, रोसनेफ्ट, देवू, काजमूनेगाज (केएमजी), पेट्रो वियतनाम, सीएनपीसी, सिनोपेक, पीडीवीएसए, पेट्रोनास, अनाडारको और इकोपेट्रोल सहित आईओसीज और एनओसीज के एक मेजबान के साथ मजबूत साझेदारी गठबंधन किया है। ओएनजीसी विदेश के पास 16 देशों में 33 तेल और गैस परियोजनाओं में स्टेक  है जो कि रूस, सीरिया, वियतनाम, कोलंबिया, सूडान, दक्षिणी सूडान, वेनेजुएला, ब्राजील, म्यांमार  और अजरबेजान में हैं।
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आजादी की रोचक बातें
-भारत से पहले पाकिस्तान का जन्म भारत के अंतिम वायसराय लाउड माउंडवेंटन ही वो व्यक्ति थे जिन्होंने भारत और पाकिस्तान की आदाजी का दिन चुना। विवाद को जन्म देने से बचने के लिए वायसराय ने 14 अगस्त को पाक को आजादी दी और लाहौर को उसकी राजधानी घोषित कर दी। माउंटबेटन ने भारत की स्वतंत्रता के लिए 15 अगस्त का दिन तय किया क्योंकि इस दिन को वे अपने कार्यकाल के लिए बेहद सौभाग्यशाली मानते थे। इसके पीछे खास वजह थी। असल में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में 15 अगस्त के ही दिन जापान की सेना ने उनकी अगुवाई में ब्रिटेन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। माउंटबेटन उस समय संबद्ध सेनाओं के कमांडर थे।

गांधी जी ने नहीं सुना था नेहरू का संदेश
जवाहर लाल नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टनीÓ 14 अगस्त की मध्यरात्रि को वायसराय लॉज से दिया था। तब नेहरू प्रधानमंत्री नहीं बने थे। इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना, लेकिन गांधी उस दिन नौ बजे सोने चले गए थे।            
आजादी के दिन एकता की मिसाल पेश कर रहे थे गांधी
आज़ादी के दिन महात्मा गांधी दिल्ली से हज़ारों किलोमीटर दूर बंगाल नोआखली में थे, जहां वे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन पर थे।

-बिना राष्ट्रगान के जश्न भारत 15 अगस्त को आज़ाद जरूर हो गया, लेकिन उसका अपना कोई राष्ट्र गान नहीं था। रवींद्रनाथ टैगोर जन-गण-मन 1911 में ही लिख चुके थे, लेकिन यह राष्ट्रगान 1950 में ही बन पाया।

पहला झंडा लालकिले पर नहीं फहराया
लाल किले पर नहीं पहराया गया था झंडा हर स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय प्रधानमंत्री लालकिले से झंडा फहराते हैं, लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था। नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लालकिले से झंडा फहराया था।

15 अगस्त, तीन देश हुए आजाद
तीन देशों की आजादी 15 अगस्त भारत के अलावा तीन अन्य देशों का भी स्वतंत्रता दिवस है। दक्षिण कोरिया जापान से 15 अगस्त, 1945 को आज़ाद हुआ। ब्रिटेन से बहरीन 15 अगस्त, 1971 को और फ्रांस से कांगो 15 अगस्त, 1960 को आज़ाद हुआ।

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