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सुप्रीम कोर्ट बोला- तीन तलाक असंवैधानिक, 3 तलाक के बारे में सबकुछ जानें


triple talaq is unconstitutional

-7 साल बाद बड़ा फैसला : अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में सुनाया था फैसला
-अब 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला
-तीन जजों ने कहा- तीन तलाक असंवैधानिक
-दो जजों ने कहा- नया कानून बनाये सरकार
-.केंद्र सरकार को 6 महीने में बनाना होगा कानून
- लखनऊ में तलाक शुदा महिलाओं ने जलेबी खाकर जश्न मनाया
-मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने मिठाई बांटी

दीपक राय, भोपाल।। तीन तलाक की कथित 1400 साल पुरानी परंपरा को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दे दिया। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात को साफ किया। कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक असंवैधानिक है, केंद्र सरकार को इसको लेकर 6 महीने के अंदर कानून बनाना चाहिए। फरवरी 2016 में सायरा बानो ने तीन तलाक को बंद करने के लिए याचिका दायर की थी। 18 महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया। 5 जजों की पीठ में से 3 जजों ने तीन तलाक को प्रतिबंधित करने का फैसला दिया। जजों ने कहा तीन तलाक शून्य, असंवैधानिक और गैरकानूनी है। बेंच में शामिल दो जजों ने तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगाने के आदेश दिए। जजों ने कहा- सरकार इस पर संसद में कानून बनाए। इस फैसले को 7 साल बाद कोर्ट द्वारा दिया गया सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या में मंदिर-मस्जिद पर फैसला सुनाया था।

अद्भुत है यह फैसला
5 जज, सभी अलग-अलग धर्मों से
जस्टिस जेएस खेहर (सिख)
जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चियन)
जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी)
जस्टिस यूयू ललित (हिंदू)
जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम)
5 judge bench of suprime court


मुख्य जज जस्टिस ख़ेहर ने कहा
आप हर शुक्रवार को मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं। इसमें आप तलाक़ को पाप और गलत बताते हैं। आप ये कैसे कह सकते हैं कि ये इस्लाम का अटूट हिस्सा है?


जस्टिस कुरियन बोले
क्या जिस चीज़ को भगवान ने ग़लत माना है उसे इंसान क़ानून के द्वारा सही ठहरा सकता है।

जस्टिस नरीमन बोले
जस्टिस नरीमन ने कहा कि तीन तलाक 1934 के कानून का हिस्सा है। उसकी संवैधानिकता को जांचा जा सकता है। तीन तलाक असंवैधानिक है।

चीफ जस्टिस बोले- मनमर्जी की परंपरा खत्म करते हैं
6 महीने में सरकार बनाए कानून
मुख्य जज जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक पर 6 महीने तक रोक लगाने और सरकार द्वारा कानून बनाने की बात कही। जजों ने कहा कि राजनीतिक दलों को इस मामले पर विरोध को दरकिनार करना चाहिए। चीफ जस्टिस और नजीर ने अपने फैसले में ये भी कहा कि उम्मीद है कि केंद्र अपने कानून में मुस्लिम संगठनों की चिंताओं और शरिया कानून का ध्यान रखेगा। 3 जजों ने कहा कि तीन तलाक की परंपरा मर्जी से चलती दिखाई देती है, ये संविधान का उल्लंघन है। इसे खत्म होना चाहिए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का तर्क
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड केवकील सैफ महमूद ने कहा- चीफ जस्टिस ने कहा कि पर्सनल लॉ से जुड़े मुद्दों को न तो कोई संवैधानिक अदालत छू सकती है और न ही उसकी संवैधानिकता को वह जांच-परख सकती है।

क्या है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 1973 में रजिस्टर्ड हुआ। इस बोर्ड को बनाने का मकसद मुस्लिम कौम की बातों को कहने का एक मंच माना जाता था। बोर्ड मुसलमानों का ठेकेदार नहीं है, बल्कि वो मुस्लिम समुदाय का एक प्रतिनिधित्व है।

ये हैं संघर्ष की मूर्ति
3 महिलाओं ने 3 तलाक को खत्म करवाया
इस मामले पर तीन तलाक की पीडि़त महिलाओं के अलावा कुछ संगठनों ने भी इस मसले पर कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। जिनके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पक्ष भी जानें। इस केस में यूं तो कई याचिकाकर्ता हैं, मगर तीन महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने इस बहस को एक नया रूप देने का काम किया।
सायरा बानो
15 सालों तक शादी के बंधन में रहने के बाद सायरा को उसके शौहर ने 2015 में तलाक...तलाक...तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर दिया था। इसके बाद सायरा ने फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सायरा ने अपनी याचिका में तलाक-ए बिदत (एक साथ तीन बार तलाक बोलकर तलाक देना), बहुविवाह और निकाह हलाला को संविधान के मौलिक अधिकारों के आधार पर गैरकानूनी घोषित करने की मांग की। सायरा के शौहर ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला देते हुए इन तीनों बिंदुओं का विरोध किया। सायरा उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं।

इशरत जहां
पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां ने अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 30 साल की इशरत ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके पति ने दुबई से ही फोन पर तलाक दे दिया। अपनी याचिका में इशरत ने कोर्ट में कहा है कि उसका निकाह 2001 में हुआ था और उसके चार बच्चे भी हैं जो उसके पति ने जबरन अपने पास रख लिए हैं।
याचिका में इशरत ने बच्चों को वापस दिलाने और उसे पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की है। इशरत ने कहा है कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। याचिका में कहा गया है कि ट्रिपल तलाक गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है।

जाकिया सोमन
जाकिया सोमन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक हैं। इनके संगठन ने लगभग 50 हज़ार मुस्लिम महिलाओं के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था। ज्ञापन में ट्रिपल तलाक को ग़ैर क़ानूनी बनाने की मांग की गई थी। इस ज्ञापन पर मुस्लिम समाज के कई मर्दों ने भी हस्ताक्षर किए थे। खास बात ये है कि ये संस्था पिछले 11 सालों से मुस्लिम महिलाओं के बीच काम कर रही है। इस संस्था ने देश के 10 राज्यों में मुस्लिम महिलाओं के बीच सर्वे किया था। ये सर्वे करीब 4700 महिलाओं पर किया गया। 2012 में सस्था ने दिल्ली में पहली पब्लिक मीटिंग की, जिसमें देशभर से करीब 100 महिलाएं ऐसी आईं जो ट्रिपल तलाक से पीडि़त थीं। इन तीनों महिलाओं के अलावा आफरीन और दूसरी कई महिलाओं ने भी कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर की थीं।


अब क्या करेगा पर्सनल लॉ बोर्ड
10 सितम्बर को भोपाल में होगी बैठक, बड़ा निर्णय संभव
निर्णय का विधिक अध्ययन कराकर ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 10 सितम्बर को भोपाल में प्रस्तावित बैठक में फैसला लेगा। इससे पहले बोर्ड उच्चतम न्यायालय के निर्णय का विधिक अध्ययन कराया जायेगा। हालांकि शिया मुस्लिमों के धर्मगुरूओं ने अपने तटस्थ रखने का प्रयास किया है। तो वहीं कुछ अन्य धर्मगुरूओं व मौलानाओं ने किसी को भी शरियत के इस कानून में दखल देने का अधिकार नहीं है।  न्यायालय के आये निर्णय पर ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि 10 सितम्बर को भोपाल में होने वाली बैठक में तीन तलाक के सम्बन्ध में मुल्क के कानून को ध्यान में रखते हुए शरीयत के दायरे में कोई फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रारम्भिक तौर पर बोर्ड का मानना है कि पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिये, लेकिन बोर्ड यह भी चाहता है कि मुल्क के कानून का भी पूरी तरह पालन होना चाहिये। उन्होंने कहा कि दस सितम्बर को भोपाल में इस्लामिक विद्वान और कानूनों के जानकार बैठेगें। मिल बैठकर कोई निष्कर्ष निकालेंगे।

तीन तलाक की बड़ी फेहरिस्त
-17 करोड़ मुस्लिम आबादी, 8.3 करोड़ महिलाएं
- 4 मुस्लिम महिलाओं को तलाक मिलता है, जबकि 1 पुरुष
-68 प्रतिशत हिंदू महिलाएं तलाकशुदा
-23.3प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं तलाकशुदा

वर्सन- कौन क्या बोला
ये फैसला ऐतिहासिक है। यह मुस्लिम महिलाओं को समानता देता है और महिला सशक्तीकरण के लिए एक मजबूत सुधार है।
- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

कानून को लाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि बोर्ड अपने कानून के हिसाब से ही चलता है।
- ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

पार्लियामेंट से हमारी सिफारिश है कि जो भी कानून बनाया जाए, वह शरियत की रोशनी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बात सुनने के बाद बनाया जाए। हमें उम्मीद है कि कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हिसाब से ही बनेगा।
- मो. अरशद फारुखी,मौलाना, दारुल उलूम, देवबंद

तीन तलाक खत्म होना न्यू इंडिया की ओर बढ़ता कदम: शाह
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा- यह फैसला न्यू इंडिया की ओर बढ़ता हुआ एक कदम है। तीन तलाक पर सुप्रीमकोर्ट का निर्णय- मुस्लिम महिलाओं के लिए स्वाभिमान पूर्ण एवं समानता के एक नए युग की शुरुआत है। फैसला किसी की हार या जीत नहीं है, बल्कि समानता के अधिकार की नई शुरुआत है।

जाति धर्म के नाम पर नहीं होने देगें नाइंसाफी: नजमा हेपतुल्ला
मणिपुर की राज्यपाल व पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने कहा- सुप्रीम कोर्ट हमेंशा से न्याय मिला है और आज भी महिलाओं को न्याया मिलेगा। तलाक को लेकर जो गलत फहमिया है वो खत्म हो जाएगी।


और जिला मौलाना का नापाक बयान
जो महिलाएं गलत हैं, उन्हें ही मिला तलाक
मुरादाबाद के जिला इमाम मौलाना रईस ने कहा, अगर सरकार कोई कानून बनाएगी या फिर कोर्ट उस पर फैसला देगा तो हमारे यहां उसे कोई कबूल नहीं करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे मजहब में अल्लाह का बनाया कानून चलता है। उसे बदला नहीं जा सकता, तीन तलाक अल्लाह का कानून है। आमतौर पर तलाक तभी होता है, जब औरत गलत होती है। कोई शौहर बीवी को तलाक देना नहीं पसंद करता। तीन तलाक जिन महिलाओं को मिला है, वह पीडि़त नहीं बल्कि गलत हैं।


शियाओं में तीन तलाक की समस्या नहीं: कल्बे सादिक
बोर्ड के उपाध्यक्ष और शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक ने दो टूक कहा कि तीन तलाक का शिया समुदाय में चलन ही नहीं है। शियाओं में तीन तलाक कोई समस्या नहीं है। इसलिये वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे।

हम सुप्रीम कोर्ट निर्णय का स्वागत करते हैं। हम मानते हैं कि सभी पक्ष इससे सहमत होंगे। तीन तलाक इस्लाम के खिलाफ है। फैसले से भेदभाव की परंपरा का अंत हुआ और महिलाओं को बराबरी का हक मिला।
-रणदीप सुरजेवाला, प्रवक्ता कांग्रेस

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