प्रदेश का अनूठा विश्वविद्यालय, चित्रकूट विश्वविद्यालय
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दीपक राय, चित्रकूट से...
आज जब शिक्षा के गिरते स्तर और रोजगार की समस्या एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इस बीच मध्य प्रदेश में एक ऐसा विश्वविद्यालय कार्यरत हैं जो छात्रों को रोजगार परक शिक्षा प्रदान कर रहा है। महात्मां गांधी के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय उनके सिद्धांतों पर कार्य कर रहा है। 24 जून 2017 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली की अध्यक्षता में महात्मा गांधी ग्रामोदय चित्रकूट विश्वविद्यालय प्रबंध मंडल की 51वीं बैठक राजभवन भोपाल में हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय के अच्छे कार्यों को सराहना भी मिली। कुलपति नरेश चंद्र गौतम ने राज्यपाल को विश्वविद्यालय के प्रयासों के बारे में अवगत कराया। लोक शिक्षा एवं जनसंचार विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र व्यास बताते हैं कि कुलपति गौतम जी के प्रयासों के चलते यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सबसे खास विश्वविद्यालय बन गया है। कुलपति नरेश चंद्र गौतम बताते हैं कि विश्वविद्यालय में ग्रामीण विकास और कौशल का बढ़ावा देने के लिए बीएसडब्ल्यू कोर्स का संचालन किया जा रहा है, यह जिम्मा प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय को देने के बजाय मुख्यमंत्री ने चित्रकूट विश्वविद्यालय को ही दिया।
रोजगारपरक शिक्षा का पर्याय
* नेक द्वारा पहली बार में ही मिल चुका ए ग्रेड
* केंद्रीय विश्वविद्यालय बनवाने के लिए किए जा रहे प्रयास
* कुलपति नरेश चंद्र गौतम ने बदली विश्वविद्यालय की तस्वीर
यह है खास कोर्स
* सम्यक तकनीक (एप्रोरिएट टेक्नॉलोजी) का विकास, प्रचार-प्रसार एवं शिक्षण
* गांवों के विकास के लिये अक्षय कृषि तकनीकों में अनुसंधान
* ग्रामीण संसाधनों का प्रबंधन
* महिलाओं सहित ग्रामीण जनता को शिक्षा देकर उनका सशक्तिकरण करना एवं उनमें जागरूकता पैदा करना
* उर्जा के वैकल्पिक साधनों पर अनुसंधान
* ग्रामीण कलाकारों एवं शिल्पकारों में कौशल विकसित करना
मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय में बीएसडब्ल्यू कोर्स संचालित किया जा रहा है। यह कोर्स मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ड्रीम कोर्स है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के साथ चित्रकूट विश्वविद्यालय पूरे प्रदेश में इस कोर्स का सफल संचालन कर रहा है।
राम जी की पवित्र भूमि में स्थापित
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के सतना जिले में मन्दाकिनी नदी के किनारे चित्रकूट में स्थित है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी के ग्रामीण विकास के स्वप्न को साकार कर ग्राम स्वराज्य की स्थापना है। अत: सम्यक तकनीक की शिक्षा और इसका प्रसार करना इसका प्रमुख लक्ष्य है। इसकी स्थापना 12 फऱवरी सन 1991 को महाशिवरात्रि के दिन मध्यप्रदेश सरकार के अधिनियम (9, 1991) के द्वारा हुई।
योग पर विशेष जोर
विख्यात समाज सेवी नानाजी देश मुख योग को बढ़ावा देने के लिए धर्मनगरी में खाले गए महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय में योग की कक्षाएं शुरू की थी। जिसमें छात्र-छात्राओं को इस विषय को लेने लिए अनिवार्य किया गया था। अब भी विश्वविद्यालय में योग की कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
गौरतलब है कि विख्यात नाना जी देश मुख कहा करते थे कि शरीर को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए योग करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही आयुर्वेदिक जड़ी बुटी में महत्वपूर्ण हैं। जिसके लिए जब महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय का उन्हें कुलाधिपति बनाया गया तो उन्होंने योग विभाग खोला था। जिसके तहत योग का विषय लेने के लिए अनिवार्य किया गया था। उन्होंने धर्मनगरी के आसपास के 500 गांवों को विकास के लिए गोद भी लिया था। जहां योग के प्रचार के लिए दंपति रखे गए थे। इसके साथ ही ग्रामीणों के इलाज के लिए दादी मां का बटुआ योजना चलाई थी। जिसमेें ग्रामीणों को घर में विभिन्न जड़ी बूटी घर में रखने के लिए प्रेरित किया जाता रहा है। आज भी इस विश्वविद्यालय में योग की कक्षाएं चल रही हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री भी कर चुके तारीफ
उच्च शिक्षा मंत्री जयभान पवैया ने कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा प्रणाली अपनाने पर चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की सराहना की है। पवैया ने कहा कि चित्रकूट विश्वविद्यालय वास्तविक रूप में ग्रामीण शिक्षा और कौशल तकनीक के लिए कार्य कर रहा है।
कुलपति की तारीफ करते हैं छात्र
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| naresh chandra gautam |
विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का कहना है कि जबसे नरेश चंद्र गौतम सर कुलपति बनकर आए हैं विश्वविद्यालय का स्वरूप ही बदल गया। यहां विकास कार्य तेजी से हुए हैं। सबकुछ तय समय में किया जा रहा है। शिक्षण कार्य में सुधार आया है। छात्र बताते हैं कि कुलपति से वाट्सएप के माध्यम से भी छात्रों से संपर्क में रहते हैं। वे नित नए प्रयोग करते हैं जिससे शिक्षा का नया माहौल तैयार होता है।
पुरुषों से 30 प्रतिशत अधिक काम करती हैं महिलाएं
ग्लोबल स्किल एण्ड एम्पलॉयमेंट पार्टनरशिप समिट-2017 के 'महिला कौशल उन्नयन एवं रोजगार संभावनाएंÓ सत्र में चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेशचन्द्र गौतम ने कहा कि महिलाएं कुशल होने के साथ पुरुषों से 30 प्रतिशत अधिक काम करती हैं। गौतम बताते हैं कि विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाली बालिकाओं को शाम को 2 घंटे कौशल विकास शिक्षा भी दी जाती है और इसका प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षित कर उद्यमिता से जोड़ें।
नानाजी : संघ का ऐसा कार्यकर्ता जिसने मन से गांधी और जेपी को स्वीकारा
(प्रख्यात पत्रकार प्रभाष जोशी जी ने अपने आलेख 'चित्रकूट के घाट पर' लिखा था)
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| nana ji deshmukh |
नानाजी देशमुख यानी विचारबद्ध (या विचारणीय) लोगों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऊंचे ऑपरेटर। यही विश्वविद्यालय के संस्थापक थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी एक फासिस्ट हिंदू संगठन। ठप्पा लगाकर आदमी और संगठन को इस तरह एक खाने में डाल देने में हमारे विचारबद्ध लोगों को बड़ी आसानी है। नानाजी देशमुख मुझे उसी जमात के बचे-खुचे लोगों में से लगते हैं। मुझे मालूम है कि सब उन्हें संघी मानते हैं और वे खुद भी अपने को एकनिष्ठ स्यवंसेवक ही कहते हैं। नाथूराम गोडसे के सूत्र खोजकर संघ को भी गांधी की हत्या के प्रेरक संगठनों में माना गया है। और अब हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी स्वदेशी आंदोलन चला रहा है लेकिन गांधी को मानने वाले संघ में कितने लोग हैं? बुद्ध, महावीर और गांधी की अहिंसा को हिंदुओं के पराभव के लिए जिम्मेदार मानने वाले प्रतिक्रियावादी संघ में बजरंग दल से कोई कम नहीं हैं। लेकिन नानाजी देशमुख के मित्र और परिवार गांधी, माक्र्स, सावरकर, अरविंद और एडम स्मिथ सब को मानने वालों में हैं। उन्होंने विवाह नहीं किया इसलिए जिसे अपना कहते हैं वैसा उनका कोई परिवार नहीं है। लेकिन उन्हें देश में कहीं भी होटल, लॉज, धरमशाला या सर्किट हाउस में नहीं रुकना पड़ता। सब जगह उनके परिवार हैं और उन्हीं में वे रहना पसंद करते हैं। प्रवास उनके संबंधों का विस्तार का स्थायी माध्यम है। अभी उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और मराठी में तो छोटे को नाना कहते हैं। मैं कोई साठ साल से उत्तर भारत और हिंदी में हूं क्योंकि यहां नाना मां का बाप होता है। नानाजी का अपना घरोपा जेपी आंदोलन में हुआ। पटना में जब जेपी को लाठी लगी तो उसे पहले अपने पर लेने वाले नानाजी देशमुख ही थे। उस दिन जेपी के सभी फोटुओ में नानाजी कहीं न कहीं दिखते हैं क्योंकि वे जेपी को अकेला छोडऩे को तैयार ही नहीं थे। मैं नहीं कहूंगा कि नानाजी ने जेपी को बचा लिया लेकिन इतना जरूर है कि पहले नानाजी को कुछ होता और फिर जेपी को। जेपी के गांधी, सर्वोदयी और समाजवादी संगी साथियों को उनका नानाजी देशमुख पर भरोसा करना कोई सुहाता नहीं था। मोरारजी ने जनता पार्टी के तब के जनसंघ घटक में से जिन तीन लोगों को मंत्री बनाने का ऐलान किया उनमें एक नानाजी थे। नानाजी को उद्योग मंत्री होना था, लेकिन वे नहीं बने। जेपी भी पहले तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ को शंका और अविश्वास से ही देखते थे, लेकिन संपूर्ण क्रांति आंदोलन के दौरान उनका रवैया सर्वग्राही हुआ। वे नक्सलवादियों से भी बात करते थे और संघियों और जनसंघियों से भी। वे किसी को भी उस आंदोलन से दूर नहीं रखना चाहते थे। उन कम्यूनिस्टों और बुद्धिजीवियों को भी नहीं जो संपूर्ण क्रांति का मजाक उड़ाया करते थे। देश की एक धारा के दो किनारों को जोडऩे वाले जेपी के एक पुल नानाजी देशमुख थे। जेपी खुद ही नानाजी को बताते थे कि उनके सर्वोदयी और समाजवाद के संगी साथी किस तरह उनसे छिड़कते हैं और नानाजी भी जानते थे कि जेपी से उनके साथ को संघ में किस तरह से देखा जाता है। जनता सरकार बनने के बाद सरकार के बजाय जेपी के साथ रहने वालों में नानाजी भी एक थे। लेकिन मोरारजी ने जनता पार्टी के तब के जनसंघ घटक में से जिन तीन लोगों को मंत्री बनाने का ऐलान किया उनमें एक नानाजी थे। नानाजी को उद्योग मंत्री होना था। नानाजी नहीं बने। फिर सालभर बाद राजनीति से संन्यास लेकर रचनात्मक कार्य में लगने की घोषणा की और उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बैठ गए। वहां जयप्रभा ग्राम चल रहा है। दिल्ली में उन्होंने अपने मित्र दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर एक शोध संस्थान बनाया है जो देशभर में काम करता है। चित्रकूट में बन रहा ग्रामोदय विश्वविद्यालय भी गांधी के ग्राम स्वराज्य की कल्पना को साकार करने का प्रयोग है। चित्रकूट में ही रामनाथ गोयनका की याद में वे एक संस्थान खड़ा कर रहे हैं जिसमें संचार के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों और कठपुतली से लेकर लोकनृत्य जैसे पारंपरिक माध्यमों से जनसंचार और जनशिक्षण के प्रयोग होंगे। अब गांधी, जेपी, दीनदयाल उपाध्याय और रामनाथ गोयनका से अपने संबंधों और देश समाज में उनके योगदान को निरंतर रखने के लिए संस्थाएं खड़ी करना और उन्हें स्वतंत्र रूप से चलाना नानाजी के तीसरे पहर का संकल्प है। दीनदयाल उपाध्याय तो संघ और जनसंघ के थे लेकिन गांधी, जेपी और रामनाथ गोयनका को तो आप संघी नहीं कह सकते ना! या नानाजी के अपना लेने से वे भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हो गए हैं?



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