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पढ़िएगा जरूर... शहीद ने नाक बचाई, नेता-अफसरों की नाक कट गई...


सतना से दीपक राय लाइव...
सुबह के 6 बजे हैं। ये सतना शहर का सिविल लाइन इलाके पर खड़ा हूँ। कलेक्टर, SP से लेकर जज सब यहीं रहते हैं। हर बार की तरह मैंने अमर शहीद राजेन्द्र सेन की प्रतिमा के सामने शीश झुकाया। उनसे ऊर्जा लेने की कोशिश की। सेन जैसे जवानों की वजह से ही सतना चेन-अमन से सो पाता है। लेकिन मुझे सतना के अफसर, नेताओं, बुद्धिजीवियों की असंवेदनशीलता पर तरस आता है। अमर शहीद की मूर्ति की नाक पिछले 6 महीने से क्षतिग्रस्त है। सुधारने के नाम पर उसका नक्शा और बिगाड़ दिया गया। देश के लिए शहीद होकर राजेन्द्र सेन ने सतना की नाक ऊंची कर दी थी, लेकिन आज उनकी  प्रतिमा की नाक ठीक न कराकर सतना के अफसर, नेता और बुद्धिजीवियों ने अपनी ही नाक कटा ली। और शर्म तो उन लोगों को भी आना चाहिये जिन्होंने प्रतिमा पर विज्ञापन चिपका दिया। मैंने फ़ोटो क्लिक करने के बाद ये विज्ञापन फाड़ दिया।
बताते चलूं... वीर सपूत, सतना का शेर, अमर शहीद राजेन्द्र सेन खेरी गांव के निवासी थे। कारगिल युद्ध के दौरान 1999 में मद्रास रेजिमेंट से आपरेशन विजय में शामिल हुए, अपनी मातृभूमि के लिए वीरगति को प्राप्त हुए। 25 साल की उम्र में शहीद होने वाले सेन अपने पीछे मां, पिता, पत्नी, 2वर्ष का बेटा छोड़कर चले गए। उनका बेटा विकास सेब अब 20 बरस का हो गया होगा।
खेर...
मेरी बस आ गई है, आगे का सफर अभी बाकि है...
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(लेखक दीपक राय भोपाल में न्यूज़ एडिटर हैं)





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